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मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की आवश्यकता

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मानसिक स्वास्थ्य से अभिप्राय है व्यक्ति के ज्ञान संबंधी और / या भाव संबंधी हाल का। ये व्यक्ति की सोच, भावनाओं को महसूस करने और व्यव्हार करने को दर्शाता है।

मनोरोग की दशा में व्यक्ति का दिमाग इस प्रकार से हो जाता है कि उसकी सोच, भावनाएं, व्यव्हार उसके स्वयं के प्रति और/ या दूसरों के प्रति या अपने आस पास के वातावरण के प्रति परेशानी भरा हो जाता है।

मनोरोग व्यक्ति के खुश रहने की क्षमता और योग्यता पर प्रभाव डालता है। व्यक्ति के जीवन जीने के तरीके, कार्यों और मनोमिति/ ज़हनी लचीलेपन पर असर करता है।

शारीरिक रोगों को भांपने आसान होता है लेकिन मनोरोगों को भांपने बहुत कठिन कार्य है, मनोरोगी के लक्षणों को देखकर अक्सर लोग ये कह देते हैं कि ये इस व्यक्ति का स्वाभाव है जिसकी वजह से धीरे धीरे मनोरोग बढ़ता जाता है और गंभीर रूप ले लेता है।

मनोरोगों के प्रति लोगों में भ्रांतियाँ बहुत अधिक व्याप्त हैं जैसे मनोरोग का अर्थ लोग पागलपन समझते हैं, अन्धविश्वास के कारण लोग मनोरोगों को काला जादू, नज़र लगना, किसी ने कुछ कर दिया ऐसे बहुत से नाम दे देते हैं और झाड़- फूक, मंदिर, मज़ार, बाबाओं के चक्कर लगाते हैं, अपना समय, पैसा, मेहनत बर्बाद करते हैं। तब तक मनोरोग गंभीर रूप ले चुका होता है।

मनोरोगों के प्रति व्याप्त भ्रांतियों को हम सबको मिलकर ख़त्म करना होगा। जैसे दूसरी शारीरिक बीमारियां हैं उसी प्रकार मनोरोग भी हैं , जिनका सफल इलाज संभव है।

जिस प्रकार शारीरिक बीमारी के लिए हम चिकित्सक के पास बेझिझक जाते हैं उसी प्रकार मनोरोगों के लिए भी बेझिझक जाएं इसमें कोई बुराई नहीं है । जिस प्रकार सर्दी होने में आपका दोष नहीं होता उसी प्रकार मनोरोग होने में भी आपका कोई दोष नहीं होता।

मनोरोग किसी को भी, किसी भी उम्र में हो सकता है, छोटे बच्चों को भी हो सकता है।

कुछ सामान्य मनोरोग है डिप्रेशन, एंग्जायटी, फोबिया / डर, ईटिंग डिसऑर्डर, ऑब्सेसिव कॉम्पल्सिवे डिसऑर्डर, चिंता/ फ़िक्र।
कुछ गंभीर मनोरोग हैं स्चीजोंफेर्निया, बाईपोलर डिसऑर्डर, क्लीनिकल डिप्रेशन, आत्महत्या की प्रवृत्ति, पर्सनालिटी डिसऑर्डर।
इनके अलावा सैकड़ों मनोरोग होते हैं।

मनोरोग होने के प्रमुख कारण हैं :- अनुवांशिक कारण, जन्म से पहले का गर्भावस्था में प्रभाव, जीवन के नकारात्मक अनुभव, चोट या बीमारी के कारण दिमाग पर असर, मनोवैज्ञानिक आधात और पारिवारिक समस्याएं।

मनोरोगी को पहचानने के सरल लक्षण जो आप देख सकते हैं

चिड़चिड़ापन, झगड़ालू प्रवित्ति, छोटी छोटी बातों में बुरा मान जाना, बात बात पर गुस्सा करना, शारीरिक थकन महसूस करना, कमजोरी महसूस करना, अधिक घबराहट, सीने में दर्द होना, शारीर में दर्द होना, हाथ पैर सुन्न होना, या तो अपने आपको बहुत हीन समझना या बहुत बड़ा समझना, इज़्ज़त प्राप्त करने की अत्यधिक लालसा।

हमेशा चुप रहना या उदास रहना, विचारों में उलझे रहना, एकाग्रता की कमी, चिंता का बना रहना, दोस्तों और रिश्तेदारों से संपर्क न रखना, समस्याओं का सामना न कर पाना और तनाव लेना, किसी भी काम में अपनी या दूसरों की गलती निकलना और खुद को या दूसरों को दोषी ठहराना।

शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करना, बहुत कम या बहुत अधिक खाना, दिमाग में शक, घृणा, लड़ाई-झगड़ा और हिंसा का अधिक विचार आना, आत्महत्या का विचार आना।

ये बहुत ही काम और सामान्य लक्षण हैं जिन्हें देखकर आप व्यक्ति में मानसिक रोगी होने का पता कर सकते हैं। यदि आपको या आपके आस-पास किसी व्‍यक्ति को इस तरह की समस्‍या है तो वह दिमागी अस्‍वस्‍थता का भी शिकार हो सकता है। इसके लिए तुरंत चिकित्‍सक से संपर्क कर।

मनोरोगों के कारण व्यक्ति को दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, एसिडिटी व् अलसर , लकवा , कैंसर जैसी कई बीमारियाँ भी हो सकती हैं। इसलिए सचेत रहें और मानसिक रोगों का समय पर इलाज कराएं।

मनोरोगों के इलाज हेतु मुख्यतय ये विशिष्ठ लोगों से संपर्क करें

1) मनोचिकित्सक (Psychiatrist) जो दवाई देकर इलाज करते हैं। ये चिकित्सक मनोरोगों के विशेषज्ञ होते हैं, MBBS के बाद ये डिप्लोमा या फिर MD की डिग्री मनोरोगों में हासिल करते हैं।
 

2) मनोविशेषज्ञ ( Psychologist) जो विभिन्न प्रकार के टेस्ट्स के द्वारा मानसिक रोगों का पता लगाते हैं, काउन्सलिंग, साइकोथेरेपी और अन्य प्रकार की थेरेपी के द्वारा इलाज करते हैं, ये दवाई नहीं देते। ये मनोविषय में दक्ष होते हैं।

आइये हम सब मिलकर मनोरोग के प्रति व्याप्त भ्रान्ति और शर्म को दूर भगाएं और इस पर खुलकर बात करें।

 

डॉ नेहा शर्मा काउन्सलिंग साइकोलोजिस्ट
+91-9406737485; +91-761-2400696
neha@manasyantra.com;
psychologistjbp@gmail.com