1 2 3 4 5 6 7 8 9 10
Slideshow Wordpress by WOWSlider.com v3.8

MONEY, EARNING, PROPERTY AND LIFE (HINDI ARTICLE)

क्या सिर्फ धन, संपत्ति, साधन, ख्याति, शक्ति अर्जित करने और इनका उपभोग करने के लिए ही हमारा जन्म हुआ है ?

धन कमाना अति आवश्यक है इस बात से कोई भी इंकार नहीं कर सकता, जब तक जीवन है तब तक धन की आवश्यकता प्रति दिन बनी रहेगी लेकिन अत्यधिक धन कमाने के लालच के अधीन होकर कार्य करने से हम अपने जीवन में कई नकारात्मक बातों को अंगीकार कर लेते हैं जिससे हमारा जीवन आनंदित होने के बजाए दुखों से भर जाता है। मनुष्य अगर अत्यधिक धन कमाने का लालच न करके अपने जीवनयापन के कार्य को पूरी निष्ठा व ईमानदारी से करे तो उसका जीवन सरल, सहज, आत्मीय सुख और शांति से भरपूर हो जाए। इस प्रकार धन कमाने से मानसिक शांति, संतुष्टि, ज्ञान, प्रज्ञता व समझ, प्रेम, आशा, धीरज, उदारता, सत्यवादिता, विश्वसनीयता, निष्ठा आदि सकारात्मक गुण उस मनुष्य के जीवन में अंगीकृत होंगें जिससे वह अपना सम्पूर्ण जीवन खुशी खुशी जी सकेगा। लेकिन हर किसी से ऐसी उम्मीद रखना भी नहीं चाहिए कि वह इस प्रकार जीवन जिए क्योंकि जो दुनिया में व्याप्त भौतिकवादिता है लोग वैसा ही करेंगे, हम अपने आप को बदल सकते हैं दूसरों को नहीं। हमें ऐसे लोगों से अपना बचाव भी करना होगा जो हमें लालच की राह पर चलने के लिए प्रेरित करें, जो हमारा शोषण करें या स्वयं की स्वार्थ सिद्धि के लिए उपयोग करें। अगर कोई हमारा शोषण कर चुका है, स्वयं के स्वार्थ के लिए उपयोग कर चुका है तो उसे उचित जवाब भी देना ज़रूरी है क्योंकि जिस प्रकार शोषण करना गलत है उसी प्रकार शोषित होना भी गलत है।

अत्यधिक धन कमाने की लालसा मनुष्य में शराब के नशे की लत की तरह होती है, अधिक कमाने का लालच बढ़ता जाता है जिसके कारण व्यक्ति गलत कामों में संलिप्त होने लगता है। दूसरों का शोषण करता है, उसके चरित्र का हनन होता जाता है, उसके जीवन में अहंकार, कलह, जद्दोजहद, ईर्ष्या, द्वेष, अफ़सोफ, उत्कंठा, उदासी, कुंठा, संताप, तनाव, अवरोध, कष्ट, अनिश्चितता, उसकी पीठ पीछे आलोचना, अधूरे ज्ञान का दम्भ , डर, आदि बहुत सी नकारात्मक बातें आ जाती हैं। उसके बाद भी वह अहंकार के वशीभूत होकर सोचता है कि वह बहुत बढ़िया कार्य कर रहा है, अगर कोई उसको उसकी सच्चाई से अवगत कराता है तो उस व्यक्ति के अहंकार को ठेस पहुंचती है और वह क्रोध, द्वेष, ईर्ष्या, बदला लेने की भावना आदि से ग्रसित हो जाता है। 

इसके पीछे का कारण यह है कि हमारी शिक्षा प्रणाली और सामाजिक सोच भौतिकवादिता से अत्यधिक भर गई है। आज सफलता का पैमाना धन, सम्पत्ति, ख्याति, शक्ति मात्र रह गए हैं और बच्चों को भी हम यही शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। मूल्य विहीन जीवन के कारण ही समाज में भ्रष्टाचार, बलात्कार, शोषण, घृणा, परिवारों का टूटना, माता पिता को छोड़कर बच्चों का अलग रहना, पद व प्रतिष्ठा का दुरुपयोग करना, चरित्र का हनन होना, धोखा देना, लड़ाई - झगड़े, हत्या, लूट, नशा आदि अनैतिक व गलत कार्य दिन प्रति दिन बढ़ते जा रहे हैं। हम सब इन बातों का विरोध प्रदर्शन करते हैं, दोषारोपण करते हैं लेकिन इस जड़ को समाप्त करने के लिए कुछ नहीं करते, उसी शिक्षा को खुद ग्रहण करते हैं और आगे की पीढ़ी को भी वही भौतिक मूल्य विहीन शिक्षा देते हैं।

धन बिना लालच के जीवनयापन के कार्य से उतना कामना चाहिए जिससे आत्मिक रूप से सुखी व शान्त रहकर जीवन जी सकें। अगर जीवन में कभी भी ऐसा समय आए कि मन विचलित होने लगे, परिवार और स्वयं को पर्याप्त समय नहीं दे पा सकें, मन में अहंकार, डर, संताप, कुंठा, द्वेष आदि महसूस होने लगे, लोग सामने चापलूसी करें और पीठ पीछे आलोचना करें तो सावधान हो जाना चाहिए कि हम गलत राह पर चल रहे हैं। समय रहते सावधान होकर सुधार कर लेना चाहिए ताकि जीवन में आत्मिक शांति व सुख बना रहे वरना जीवन विभिन्न प्रकार के दुखों से भर जायेगा।

धन, संपत्ति, शक्ति, पद, प्रतिष्ठा का सदुपयोग करना चाहिए न कि दुरुपयोग, प्राप्त साधनों का उपयोग करना चाहिए न कि उपभोग। सफलता को धन, संपत्ति, शक्ति आदि के आधार पर परिभाषित नहीं करना चाहिए, बड़े बंगले, गाड़ियों का काफिला, धन, संपत्ति, सुख - सुविधा के संसाधन, प्रसिद्धि होने के बाद भी अगर व्यक्ति को आत्मिक शांति और खुशी प्राप्त नहीं है तो वह व्यक्ति एक असफल व्यक्ति ही है, इसके विपरीत अगर किसी व्यक्ति के पास भौतिक संसाधन कम हैं लेकिन वह आंतरिक रूप से खुश, शांत व संतुष्ट है तो वह व्यक्ति एक सफल व्यक्ति है।

हमें स्वयं को , परिवार, समाज, देश और दुनिया को मूल्य आधारित जीवन जीने की प्रेरणा देनी चाहिए। जैसे जैसे मूल्यों का अंगीकरण होगा , सामाजिक बुराईयाँ स्वतः ही समाप्त होती जाएंगी।

धन्यवाद। 

महेश शर्मा, मानस यंत्रा जबलपुर ।