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Mental Health Awareness 10 October 2017

10 अक्टूबर को ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ मनाया जाता है, जिसकी शुरुवात 1992 में विश्व मानसिक स्वास्थ्य परिसंघ ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से करी थी I विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के हिसाब से दुनिया में 45 करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार की मानसिक बीमारी से ग्रसित हैं I लोगों में मानसिक बिमारियों के प्रति जागरूकता की कमी और शर्म के कारण वे मनोविशेषग्य या मनोचिकित्सक के पास नहीं पहुँचते I भारत में अधिकांश लोग मानसिक बीमारी को भुत बाधा, गृह दोष, काला जादू आदि मानते हैं और ज्योतिषी व् बाबा के चक्कर में पड़ जाते हैं, जिसके कारण उनकी समस्या समय पर उपचार न होने के कारण बढती जाती है I

जब किसी व्यक्ति की भावनाएँ, विचार अथवा व्यवहार दूसरे लोगों एवं स्वयं उनके लिए समस्या बन जाए तो यह उस व्यक्ति के मानसिक बीमारी से ग्रस्त होने के लक्ष्ण हो सकते हैं लेकिन सही जानकारी के अभाव में लोग इस ओर ध्यान नहीं देते जिससे समस्या गंभीर रूप धारण कर लेती है। जब तक समस्या बड़ी न हो तब तक लोगों का ध्यान मानसिक बीमारियों की ओर नहीं जाता। इसे संबंधित व्यक्ति की आदत समझकर लोग 
नजरअंदाज कर देते है जबकि कुछ लोग मानसिक बीमारी को पागलपन समझ बैठते हैं जो सिर्फ एक भ्रान्ति है । पागलपन भी एक प्रकार की मानसिक बीमारी है लेकिन हर मानसिक विकार का अर्थ पागलपन नहीं होता I  

डाइग्नोस्टिक एण्ड स्टैटिस्टिकल मैनुअल आफ मेंटल डिसआर्डर्स के नवीनतम अंक में विभिन्न प्रकार की मानसिक बिमारियों के विषय में उल्लेखित किया गया है I मानसिक बिमारियों का सही आँकलन करना बहुत आवश्यक है क्यूंकि बहुत सी मानसिक बीमारियों में लक्षण मिलते-जुलते होते हैं जिसकी वजह से कई बार गलत आंकलन होने की वजह से सालों इलाज कराने के बाद भी मरीज को आराम नहीं मिलता I

कुछ लोगों में जन्मजात ही मानसिक विकार होते हैं, कुछ लोगों में वंशानुगत तौर पर मानसिक विकार की समस्या होती है, कुछ परिस्थिति वश, आघात के कारण, गंभीर बीमारी की वजह से जैसे कैंसर, शुगर आदि या दिमागी चोट के कारण भी मानसिक विकारों से ग्रसित हो जाते हैं I विज्ञान ने आज बहुत तरक्की कर ली है जिससे मानसिक बिमारियों को समझना, उनका आंकलन करना और इलाज करना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है, लेकिन आज भी कई प्रकार की मानसिक बीमारियों का सही इलाज उपलब्ध नहीं है I

मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के दिमाग में विकार होता है और उनका स्थिति पर कोई नियंत्रण नहीं रहता जिस वजह से उसकी भावनाएं, विचार, व्यवहार आदि में कई प्रकार के बदलाव होते हैं I मेरा सभी से अनुरोध है कि अगर आपके परिवार या जान-पहचान वाले किसी व्यक्ति में आप कोई इस प्रकार से बदलाव महसूस करते हैं तो एक बार उस व्यक्ति का आंकलन किसी अच्छे मनोचिकित्सक या मनोविशेषग्य से अवश्य करवाएं ताकि समय पर बीमारी का इलाज हो सके I

मानसिक विकारों या बीमारियों को नज़रंदाज़ न करें, अन्धविश्वास से दूर रहें और शर्म का त्याग करें क्यूंकि मानसिक विकार अन्य दुसरे शारीरिक विकारों की तरह ही होते हैं I कुछ मानसिक बिमारियों या विकारों के लिए दवाओं की ज़रूरत भी नहीं होती वे मनोविशेषग्य से काउन्सलिंग और अन्य साइकोथेरेपी से भी ठीक हो जाते हैं, कई बिमारियों में साइकोथेरेपी व् काउन्सलिंग के साथ दवाओं की भी ज़रूरत होती है जो मनोचिकित्सक द्वारा लिखी जाती हैं I

डॉ नेहा शर्मा ( काउन्सलिंग साइकोलोजिस्ट, चाइल्ड साइकोलोजिस्ट, साइकोथेरापिस्ट)