1 2 3 4 5 6 7 8 9 10
Slideshow Wordpress by WOWSlider.com v3.8

RIP STEPHEN HAWKING

स्टीफन हॉकिंग दुनिया के एक महान वैज्ञानिक थे जिन्होंने अपनी बिग बैंग थ्योरी से दुनिया की सोच ही बदल दी। हॉकिंग को देखकर कोई भी यह नहीं कह सकता था कि वे इस तरह के चमत्कार भी कर सकते हैं।  स्टीफन हॉकिंग ने इच्छाशक्ति से चिकित्सा विज्ञान को भी चमत्कृत कर दिया। मोटर न्यूरॉन नामक लाइलाज और खतरनाक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति ने असंभव को भी संभव कर दिखाया।

8 जनवरी 1942 को जन्में स्टीफन हॉकिंग के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और द्वितीय विश्व युद्ध के कारण आजीविका चलाना भी बहुत चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में सुरक्षित स्थान की तलाश में उनका परिवार ब्रिटेन स्थित ऑक्सफोर्ड में आकर बस गया।

इनका स्कूली जीवन भी बहुत ही मुश्किलों में बीता, वे शुरू में अपनी कक्षा में औसत से कम अंक पाने वाले छात्र हुआ करते थे। इन्हें गणित में दिलचस्पी थी लेकिन ऑक्सफोर्ड में मैथ्स न होने की वजह से इन्हें फिजिक्स पढ़ना पड़ा।

 21 साल की उम्र में (1963) उनको मोटर न्यूरॉन नाम की लाइलाज व गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया। इस बीमारी में शरीर की नसें लगातार कमज़ोर होती जाती हैं और शरीर के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं धीरे धीरे व्यक्ति चल-फिर पाने की स्थिति में भी नहीं रह जाता है। 

इस बीमारी के कारण उनके शरीर के सारे अंगों ने काम करना बंद कर दिया और चिकित्सकों के अनुसार दो वर्षों से अधिक इनके जीवित रहने की कोई गुंजाइश नहीं थी। वे एक ज़िंदा लाश बनकर रह गए थे लेकिन उन्होंने अपनी इस स्थिति को अपने ऊपर हावी होने नहीं दिया। वे अपने शोध कार्य और सामान्य जिंदगी को निरंतर चालू रखते थे। स्टीफन हॉकिंग ने अपनी बीमारी को वरदान की तरह अंगीकार किया और तकनीक के माध्यम से अभी तक शोध कार्य कर रहे थे।

एक व्यक्ति जिसको 1963 में चिकित्सकों ने कहा था कि ज़्यादा से ज़्यादा दो वर्ष तक ही वे जीवित रह सकते हैं, वो भी एक ज़िंदा लाश की तरह बिस्तर पर पड़े रह सकते हैं। ऐसे व्यक्ति ने सिर्फ अपनी इच्छाशक्ति के दम पर 55 वर्ष से भी ज़्यादा इस बीमारी से ग्रसित होकर भी एक साहसी जीवन व्यतीत किया और अपने शोध व ज्ञान के दम पर पूरी दुनिया में नाम किया ।

 क्या हम सब लोग जो अपनी परिस्थितियों, परेशानियों, जवाबदारियों, अक्षमताओं, कमियों को गिनाते हुए कहते हैं कि हम दुखी हैं, हम कुछ कर नहीं सकते या कर नहीं पाए आदि आदि इन महान वैज्ञानिक के जीवन से शिक्षा लेकर हर बुरी से बुरी परिस्थिति से लड़ने की इच्छाशक्ति अपने जीवन में नहीं अपना सकते ?

अगर हम अपनी इच्छाशक्ति को भी इतने ऊपर तक ले जाएं तो जीवन की कोई भी बाधा हमें आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

महेश शर्मा लाइफ कोच